चैत्र नवरात्रि की कथा

चैत्र नवरात्रि की कथा

चैत्र नवरात्रि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्पूर्ण है। नवरात्र में देवी भगवती की उपासना की जाती है, जिस से जीवन में संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। नवरात्रि के नौ दिनों में किया गया तप और साधना से व्यक्ति को जीवन में नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है और व्यक्तिगत विकास होता है।

चैत्र नवरात्रि हिंदू नव वर्ष के साथ आती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और शक्ति (नारी शक्ति) की आराधना का प्रतीक है। इन नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिससे जीवन में सुख , शांति और समृद्धि आती है।

चैत्र नवरात्रि व्रत की कथा

          पौराणिक कथा के अनुसर, महिषासुर नाम के राक्षस ने एक बार ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की। ब्रह्मा जी ने महिषासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे कोई वर मंगाने को बोला। तब महिषासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा कि उन्हें कोई देवता या दानव नहीं मार सके। इस वरदान को पाते ही महिषासुर ने चारों और आतंक मचा दिया और उसने स्वर्गलोक पर अपना अधिकार प्राप्त कर लिया और देवताओं पर भी अत्याचार करने लगा।

महिषासुर के आतंक से त्रस्त हो कर सभी देवता भगवान शिव और विष्णु की शरण में गए। सारे परेशान देवताओं ने अपनी व्यथा सुनाई, देवताओं की बात सुनकर भगवान विष्णु, महादेव और अन्य सारे देवताओं ने काफी क्रोध किया। उनके क्रोध की तेज से एक महादेवी की उत्पत्ति हुई और उनका नाम मां दुर्गा देवी रखा गया।  उसके बाद सारे देवताओं ने माँ को अपने अपने अस्त्र-शस्त्र में से एक एक अस्त्र-शस्त्र भेट की। भगवान शिव ने अपना त्रिशूल, भगवान विष्णु ने अपना चक्र और अन्य सभी देवताओं ने भी अपना एक अस्त्र-शस्त्र मां दुर्गा को दिया।

माँ दुर्गा के तेज से चारों ओर काफी प्रकाश हो उठा था। तब सभी देवताओं ने मिलकर आदि शक्ति के रूप में मां दुर्गा का आह्वान किया और अपने आप को महिषासुर से बचाने का निवेदन करने लगे। उस तरफ मासिषासुर के राक्षसों ने महिषासुर को मां दुर्गा के सौंदर्य के बारे में बताया और बोला ऐसी सुंदर स्त्री तो आपके पास ही होनी चाहिए क्योंकि संसार के सारे उत्तम वास्तुओं पे उसका अधिकार हो चुका है। 

महिषासुर ने माँ दुर्गा को अपने पास लाने के लिए राक्षसों को उनके पास भेजा, परन्तू माँ दुर्गा ने महिषासुर को युद्ध के लिए  बोला और कहा कि मैं उसी के साथ जाऊँगी जो मुझे युद्ध में जीत पाएगा।  माँ दुर्गा ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों के बीच नौ दिनों तक युद्ध चला। इन नौ दिनों में नौ अलग-अलग रूप में मां दुर्गा ने महिषासुर के साथ युद्ध किया। नवे दिन मां दुर्गा ने महिषासुर को पराजित कर उसका वध कर दिया।

इन नौ दिनों में भक्त माता के इन स्वरूपों की पूजा करते हैं:

  1. माँ शैलपुत्री
  2. माँ ब्रह्मचारिणी
  3. माँ चंद्रघंटा
  4. माँ कुष्मांडा
  5. माँ स्कंदमाता
  6. माँ कात्यायनी
  7. माँ कालरात्रि
  8. माँ महागौरी
  9. माँ सिद्धिदात्री

इन नौ दिनों में माता का व्रत रखें, उनकी उपासना कर और मंत्र का जाप करने से माता की विशेष कृपा प्रदान होती है।

रामायण से जुड़ी कथा:

एक अन्य कथा के अनुसार प्रभु श्री राम का जन्म चैत्र नवरात्रि में नवमी तिथि को हुआ था। जिसे हम रामनवमी के रूप में मनाते हैं। त्रेता युग में रावण से जीतने के लिए प्रभु श्री राम ने युद्ध से पहले समुद्र तट पर मां चंडी का पाठ और चैत्र नवरात्रि का व्रत भी किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न हो कर माता ने प्रभु श्री राम को विजय होने का आशीर्वाद दिया था। ये नौ दिन बुराई पर अच्छाई की जीत और नारी शक्ति के विजय का प्रतीक है।

जय माता दी

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