Karmon-Ka-Phal-aur-kutte-ki-kahani-cover2.png

कर्मों का फल और कुत्ते की कहानी

एक पुरानी कथा है I देवश्री नारद जी पृथ्वी के भ्रमण पर निकले थे। उनकी मुलाकात वहां महर्षि अंगरा से हुई।

 एक दिन  देवश्री नारद जी और ऋषि अंगरा कहीं जा रहे थे। रास्ते में उनकी नज़र एक मिठाई की दुकान पर पड़ी। दुकान के पास ही झूठी पत्तलों का ढेर लगा हुआ था।

उनको देखा कि जैसे ही वह झूठन को खाने के लिए एक कुत्ता आता है, वैसे ही वह दुकान का मालिक उसको जोर से डंडा मारता है। डंडे की मार खा कर कुत्ता जोर से चीखता हुआ वहां से चला जाता है।

ये दृश्य देख कर देवश्री नारद जी को जोर की हंसी आ गई। ऋषि अंगरा ने उनकी हंसी का कारण पूछा तो नारद जी बोले:

“हे ईश्वर! ये दुकान पहले एक कंजूस व्यक्ति की थी।” “अपनी जिंदगी में उसने बहुत सारा पैसा इकट्ठा किया, और बहुत सारे गलत रास्ते का सहारा लिया I इस जन्म में वह कुत्ता बन कर पैदा हुआ और यह दुकान मालिक ही उसका पुत्र है I “

देखिये! जिसके लिए उसने बेशुमार दौलत इकठ्ठा किया। आज वही बेटे के हाथो से जूठा भोजन भी नसीब नहीं हुआ। कर्मों के फल के इस खेल को देखकर मुझे हंसी आ गई।

मनुष्य को अपने शुभ और अशुभ कर्मों का फल जरूर मिलता है। बेसक इसके लिए जन्मों-जन्मों की यात्रा क्यों न करनी पड़े।

इसलिए जरा अपने किए हुए कर्म पर एक बार जरूर ध्यान दें

बोलिए राधे राधे

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *