एक संत कुएं पर जंजीर से लटककर ध्यान करता था और कहता था जिस दिन ये जंजीर टूटेगी मुझे ईश्वर मिल जाएंगे। संत से पुरा गांव प्रभावित था। सभी उनकी भक्ति और उनके तपस्या की तारीफ करते थे।
उसी गांव के एक और व्यक्ति के मन में भी इच्छा हुई कि मैं भी ईश्वर दर्शन करूंगा।
वाह भी कुएं पर रस्सी से पैरों को बांध कर क्यू में लटक गया और कृष्ण जी का ध्यान करने लगा।
थोड़े समय बाद ही उसकी रस्सी टूट गई और वह कृष्ण की गोद में गिर गया और भगवान ने दर्शन भी दिए।
तब व्यक्ति ने कृष्ण से पूछा आप इतनी जल्दी मुझे दर्शन देंने क्यू चले आए जबकी वो संत तो काफी वर्षों से आपको बुला रहे हैं I
कृष्णा बोले “वो कुएं पर लटकते जरूर है लेकिन अपने पैर को लोहे की जंजीर से बांध कर लटकते हैं। उन्हें मुझसे ज्यादा जंजीर पे विश्वास है। जबकी तुमने खुद से ज्यादा मुझ पर विश्वास किया, मैं आ गया।”
जरूरी नहीं कि दर्शन में वर्ष लगे आपकी शरणगति आपको ईश्वर के दर्शन अवश्य कराएगी और जल्दी ही कराएगी।
प्रश्न केवल इतना है कि आप उन पर कितना विश्वास करते हैं।

