हनुमान-जी-ने-क्यों-लगाया-पूरे-शरीर-पर-सिंदूर-Story.jpg

हनुमान जी ने क्यों लगाया पूरे शरीर पर सिंदूर? |

सिंदूर से रंगे हनुमान: प्रभु राम के प्रति असीम भक्ति की एक अद्भुत कथा

आज हम एक ऐसी पौराणिक कथा पर प्रकाश डालेंगे जो सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और अद्वितीय भक्ति का एक जीवंत उदाहरण है। यह कथा है पवनपुत्र हनुमान की, जिन्होंने अपने प्रभु श्री राम के प्रति अपने अटूट प्रेम को दर्शाने के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर धारण कर लिया था।

आइए, अयोध्या के उस पावन काल में चलें, जब राम राज्य की स्थापना हो चुकी थी और चारों ओर सुख-शांति का वास था।

वह अनोखा दिन और जिज्ञासा भरा प्रश्न

लंका विजय के बाद, भगवान राम अयोध्या के राजा के रूप में विराजमान थे और उनके परम भक्त हनुमान, सदैव उनकी सेवा में तत्पर रहते थे। हनुमान जी का जीवन राम नाम को समर्पित था, उनके लिए प्रभु राम का कल्याण ही सर्वोपरि था।

एक दिन, हनुमान जी ने माता सीता को अपने कक्ष में श्रृंगार करते हुए देखा। माता सीता अपनी माँग में लाल रंग का एक पदार्थ लगा रही थीं। यह देखकर हनुमान जी के सरल मन में एक स्वाभाविक जिज्ञासा उत्पन्न हुई। वे माता सीता के पास गए और बड़े ही विनम्र भाव से पूछा, “हे माता, यह क्या है जो आप अपनी माँग में लगा रही हैं? इसका क्या महत्व है?”

माता सीता का हृदयस्पर्शी उत्तर

माता सीता ने हनुमान जी की जिज्ञासा को समझा और प्रेम से मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “प्रिय हनुमान, यह सिंदूर है। एक विवाहित स्त्री इसे अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए लगाती है। यह हमारे सुहाग का प्रतीक है और यह दर्शाता है कि मेरा प्रेम और सम्मान मेरे स्वामी, भगवान राम के लिए कितना गहरा है।”

एक भक्त का अनूठा विचार

माता सीता के इन शब्दों ने हनुमान जी के मन में एक गहरा विचार उत्पन्न किया। उन्होंने सोचा, “अगर माता सीता थोड़ा सा सिंदूर लगाकर प्रभु राम की आयु बढ़ा सकती हैं, तो यदि मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूँ, तो मेरे प्रभु अमर हो जाएँगे! उनकी आयु तो अनंत हो जाएगी! यह तो मेरे प्रभु के प्रति मेरा परम कर्तव्य है।”

हनुमान जी के लिए, प्रभु राम से बढ़कर कुछ भी नहीं था। उनका प्रेम इतना निश्छल और गहरा था कि वे बिना किसी संशय के, अपने प्रभु के कल्याण के लिए कुछ भी कर गुज़रने को तैयार थे। उनके मन में कोई स्वार्थ नहीं था, केवल और केवल अपने आराध्य के प्रति असीम भक्ति थी।

पूरे शरीर पर सिंदूर और प्रभु राम का आश्चर्य

बिना एक पल की देरी किए, हनुमान जी ने ढेर सारा सिंदूर लिया और अपने पूरे शरीर पर मलना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उनका पूरा शरीर गहरे सिंदूरी रंग में रंग गया, जो उनके अद्भुत प्रेम और समर्पण का प्रतीक बन गया।

इसी अनोखे रूप में हनुमान जी भगवान राम की सभा में पहुँचे। दरबार में मौजूद सभी लोग उन्हें इस रूप में देखकर चकित रह गए। स्वयं भगवान राम भी पहले तो मुस्कुराए, लेकिन फिर वे तुरंत ही हनुमान जी के इस प्रेम की गहराई को समझ गए। उनकी आँखों में प्रेम और गर्व के आँसू छलक उठे।

भगवान राम का वरदान

हनुमान जी ने हाथ जोड़कर अपनी क्रिया का कारण बताया, “प्रभु, माता सीता ने कहा कि सिंदूर आपको लंबी आयु देता है। मैंने सोचा, यदि मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूँ, तो आप सदा-सदा के लिए अमर हो जाएँगे!”

भगवान राम अपने परम भक्त के इस निश्छल प्रेम और अतुलनीय भक्ति को देखकर भाव-विभोर हो गए। उन्होंने हनुमान जी को गले से लगा लिया और उन्हें वरदान दिया कि जो भी भक्त सच्चे मन से सिंदूर अर्पित कर उनकी पूजा करेगा, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर होंगे और उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होंगी।

आज भी जीवित है वह भक्ति

यही कारण है कि आज भी हनुमान जी की मूर्तियों पर सिंदूर का लेप किया जाता है और उन्हें ‘सिंदूरी चोला’ चढ़ाने की परंपरा है। यह सिंदूर हनुमान जी के प्रभु राम के प्रति असीम और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक बन गया है।

यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति किसी दिखावे या नियम से बंधी नहीं होती, यह हृदय के प्रेम और समर्पण से उत्पन्न होती है। हनुमान जी की यह अद्भुत कहानी हमें यह प्रेरणा देती है कि हमें भी अपने आराध्य के प्रति ऐसी ही अटूट और निस्वार्थ भक्ति रखनी चाहिए।

आपको यह कथा कैसी लगी? अपने विचार कमेंट्स में ज़रूर शेयर करें!

जय श्री राम! जय हनुमान!

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *