क्या होती है व्यक्तित्व की परख

महात्मा की अँगूठी की कहानी

क्या होती है व्यक्तित्व की परख

एक जंगल में एक संत महात्मा अपने आश्रम में रहते थे। उनके चेहरे पर इतना तेज था कि कोई भी इंसान उन्हें प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था।

एक बार जंगल में एक शहर का आदमी आया, और वो महात्मा जी की आश्रम से होकर गुजरा तो देखा कीबहुत से लोग महात्मा जी के दर्शन के लिए आये हैं।

वो महात्मा जी के पास गया और बोला कि, “आप अमीर भी नहीं हैं, आपने महंगे कपड़े भी नहीं पहने हैं। आपको देख के मैं बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुआ। लेकिन ये इतने सारे लोग आपके दर्शन करने क्यों आते हैं“?

महात्मा ने अपनी बात समझने के लिए एक तरकीब निकाली  I

महात्मा जी ने उस आदमी को अपनी एक अंगुठी निकाल के दी और कहा कि– “आप इसे बाजार में बेच कर इसके बदले एक सोने की माला लेकर आना।

अब वो व्यक्ति बाजार गया और सबकी दुकान पर जा कर कि अंगुठी के बदले सोने की माला मंगाने लगा, लेकिन सोने की माला तो क्या अंगुठी के बदले कोई पीतल का एक टुकड़ा भी देने को तैयार नहीं था।

थक हार के व्यक्ति वापस महात्मा जी के पास पहुचा और बोला की– “क्या अंगुठी की तो कोई कीमत ही नहीं है। अंगुठी के बदले कोई पीतल का एक टुकड़ा भी देने को तैयार नहीं है।      

महात्मा जी मुस्कुराये और बोले की– “अब इस अंगुठी को पीछे वाली गली में सुनार की दुकान पे ले जाओ, जरा देखो वो क्या कहता है I

व्यक्ति जब सुनार की दुकान पे गया तो सुनार ने एक माला नहीं बाल्की 5 माला अंगुठी के बदले देने को कहा। व्यक्ति बड़ा आश्चर्यचकित हुआ कि क्या इस मामुली सी अंगुठी के बदले कोई पीतल की माला देने को तैयार नहीं हुआ, लेकिन ये सुनार कैसे 5 सोने की माला दे रहा है।

व्यक्ती वापस महात्मा जी के पास पहुचा और उनको सारी बातें बताईं।

महात्मा जी बोले कि चीज़ जैसी ऊपर से दिखती है अंदर से वैसी नहीं होती है। ये कोई मामुली अंगुठी नहीं है बाल्की ये एक हीरे की अंगुठी है। जिसकी पहचान केवल एक जौहरी ही कर सकता था।

पिछली गली वाला सुनार काफी पुराना और काफी ज्ञानी सुनार है जिसने असली हीरे को पहचान लिया , इसलिए वह 5 माला देने को तैयार हो गया. ठीक वैसे ही मेरी वेषभूषा को देखकर तुम मुझसे प्रभावित नहीं हुए लेकिन मेरे ज्ञान का प्रकाश  का महत्त्व ये सारे लोग समझते हैं , इसी वजह से मेरी तरफ खिंचे चले आते हैं I जिस दिन तुम सच्चे ज्ञान के बारे में समझ जाओगे, तो ये भी रहस्य समझ जाओगे I

व्यक्तित्व को महात्मा जी की बातें सुनकर बड़ी शर्मिंदगी हुई। कपड़ो से व्यक्ति की पहचान नहीं होती बाल्की उसके आचरण और ज्ञान से व्यक्ति की पहचान नहीं होती।

क्या आप भी दिखावे वालों की ओर आकर्षित होते हैं या फिर आचरण और ज्ञान के आधार पर व्यक्तित्व की पहचान करते हैं I

बोलिए राधे राधे

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