एक छोटे से गांव में एक आदमी रहता था। वो बहुत परेशान रहता था I उसके एक मित्र ने जब उसे परेशान देखा तो उसे सलाह दी कि भगवान कृष्ण की आराधना करो।
उसने बाजार जाकर कृष्ण भगवान की एक मूर्ति ले आया और मूर्ति के साथ कृष्ण भगवान की आराधना करने लगा I कई साल बीत गए परंतु उसे कोई लाभ नहीं मिला।
उसके एक दूसरे मित्र ने उसे सलाह दी कि तू मां काली की पूजा शुरू कर दे, तुम्हारे दुख जरूर दूर होंगे। अगले ही दिन वो बाजार जा के माँ काली की मूर्ति ले आया और माँ काली की आराधना करने लगा I
उसने भगवान कृष्ण की मूर्ति मंदिर के ऊपर ही बने एक तख्त पे रख दी और काली मां की मूर्ति मंदिर में रखकर पूजा शुरू कर दी। तभी उसके दिमाग में ख्याल आया कि जो धूपबती मैं काली मां जी के लिए जलाऊंगा तो उसकी खुशबू श्री कृष्ण भी सूंघ ही लेंगे। ऐसा करता हूं कृष्ण भगवान के मुंह पर कपड़ा बांध देता हूं।
जैसा ही वो ऊपर चढ़ के कृष्णा भगवान के मुंह पर कपड़ा बांधने लगा कृष्णा भगवान ने उसका हाथ पकड़ लिया। वो आश्चर्य चकित रह गया और भगवान से पूछा, “इतने वर्षो से मैं आपकी पूजा कर रहा था तब आप नहीं आये! अब आप कैसे प्रगट हो गए?”
तब भगवान श्री कृष्ण ने उसे समझाते कहा कि, “आज तक तू मुझे एक मूर्ति समझकर मेरी पूजा कर रहा था।” लेकिन आज तुझे एहसास हुआ कि, मेरे कृष्णा सांस भी ले सकते हैं, आज तुम्हारे अंदर ये भाव देखकर मैं आ गया” I
भगवान सिर्फ पूजा करने से खुश नहीं होते, आपकी भक्ति भावना भी काफी मायने रखती है I
राधे राधे

