पिछली कहानी में हमने ये जाना कि हनुमान जी ने पंचमुख रूप क्यों लिया था। आज की इस कहानी में हम उनके पूजन विधि के बारे में जानेंगे।
हनुमान जी का पंचमुखी रूप (पंचमुखी हनुमान) उनका सबसे शक्तिशाली और अद्भुत अवतार माना जाता है। इसका वर्णन मुख्यतः रामायण के उत्तरकाण्ड और बाद के ग्रंथों जैसे “हनुमद् ब्रह्माण्ड” व “हनुमान तंत्र” में आता है।
पंचमुखी रूप की पूजन विधि
हनुमान जी का यह पंचमुखी स्वरूप पाँचों दिशाओं से समग्र सुरक्षा (सर्वांगीण सुरक्षा) का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि जो भक्त पंचमुखी हनुमान जी की पूजा करता है, उसे एक साथ पाँच देवताओं (हनुमान, नरसिंह, गरुड़, वराह, और हयग्रीव) का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे उसके जीवन के सभी संकट, भय, रोग और बाधाएँ दूर हो जाती हैं। पंचमुखी हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है और इसे करने के कुछ खास नियम और लाभ हैं। आइये इसकी पूजा की विधि के बारे में जानते हैं :
पूजा सामग्री
- पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति: अगर मूर्ति हो तो पंचधातु या अष्टधातु की मानी जाती है।
- सिंदूर, चमेली का तेल, और गंगाजल
- लाल फूल, तुलसी के पत्ते, और गुड़-चना
- नारियल, केले, या कोई भी मौसमी फल
- दीपक (तेल या घी का) और अगरबत्ती
पूजा विधि
- स्नान और शुद्धिकरण: पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- स्थान की तैयारी: पूजा स्थल को साफ करके, वहाँ पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- संकल्प: हाथ में जल और फूल लेकर, अपनी मनोकामना कहते हुए पूजा का संकल्प लें।
- पंचोपचार पूजा: हनुमान जी को स्नान कराने के बाद, उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। लाल फूल, तुलसी के पत्ते, और प्रसाद चढ़ाएँ।
ध्यान और मंत्र जाप
अब पाँचों मुखों का क्रमवार ध्यान करें और संबंधित मंत्र बोलें:
पूर्वमुखी (हनुमान जी) :
ध्यान: हनुमान जी गदा धारण किए, लाल आभा से चमक रहे हैं।
मंत्र (11 बार): ॐ हं हनुमते नमः
दक्षिणमुखी (नरसिंह जी)
ध्यान: नरसिंह जी राक्षस का संहार कर रहे हैं।
मंत्र (11 बार): ॐ नृं नरसिंहाय नमः
पश्चिममुखी (गरुड़ जी)
ध्यान: गरुड़ जी अपने पंखों से नागों का नाश कर रहे हैं।
मंत्र (11 बार): ॐ गं गरुडाय नमः
उत्तरमुखी (वराह जी)
ध्यान: वराह भगवान धरती को अपने दाँतों पर धारण किए हुए हैं।
मंत्र (11 बार): ॐ वराहाय नमः
ऊर्ध्वमुखी (हयग्रीव जी)
ध्यान: हयग्रीव जी का दिव्य प्रकाश ज्ञान का दीप जला रहा है।
मंत्र (11 बार): ॐ ऐं हयग्रीवाय नमः
ध्यान के बाद आप हनुमान जी का पाठ कर सकते हैं
पंचमुखी हनुमान कवच: इसका पाठ करने से सभी प्रकार की बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।
हनुमान चालीसा या सुंदरकांड: इनका पाठ बहुत शुभ माना जाता है।
मंत्र: “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट” मंत्र का जाप 108 बार करें।
पूजा के लाभ
- सर्वांगीण सुरक्षा: पंचमुखी हनुमान जी की पूजा से जीवन के पाँचों क्षेत्रों (शत्रु, रोग, भय, धन, और ज्ञान) में सुरक्षा मिलती है।
- संकटमोचन: यह रूप सभी प्रकार के संकटों और बाधाओं को दूर करता है।
- नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: घर में पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति रखने से नकारात्मक ऊर्जा, जादू-टोना और बुरी शक्तियों का प्रभाव खत्म होता है।
- ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि: हयग्रीव मुख के कारण यह पूजा ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करती है।
- धन और समृद्धि: वराह मुख के प्रभाव से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
क्या आप भी हनुमान जी की पूजा करते हैं, अगर हां तो कैसे करते हैं कमेंट करके जरूर बताएं
जय हनुमान


