टैटू करवाने के तुरंत बाद ब्लड डोनेट ना करने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि इसमें संक्रमण (infection) का जोखिम हो सकता है। इसका मुख्य कारण टैटू बनवाने की प्रक्रिया और शरीर की प्रतिक्रिया है। नीचे विस्तार से बताया गया है:
1. संक्रमण (Infection) का खतरा:
टैटू बनवाते समय त्वचा में सुई चुभाई जाती है, जिससे शरीर में छोटे घाव होते हैं। अगर टैटू बनाने वाले उपकरण या स्याही पूरी तरह से सेनेटाइज न हों, तो HIV, हेपेटाइटिस B और C जैसे संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए यदि कोई हाल ही में टैटू करवाता है और उसी समय ब्लड डोनेट करता है, तो ये संक्रमण (अगर हो) रक्त के ज़रिए दूसरे व्यक्ति को भी पहुँच सकता है।
2. इसकी प्रतीक्षा अवधि क्या है (Waiting Period):
भारत में और कई अन्य देशों में टैटू के बाद 6 महीने से 1 साल तक ब्लड डोनेट करने की अनुमति नहीं होती। भारत में: आमतौर पर 6 महीने का गैप अनिवार्य माना जाता है। यदि टैटू किसी रेगुलेटेड और प्रमाणित (licensed) टैटू आर्टिस्ट से करवाया गया है, तो कुछ स्थानों पर ये अवधि कम भी हो सकती है।
3. शरीर की रिकवरी:
- टैटू बनवाने के बाद शरीर को हीलिंग (healing) में समय लगता है। इस दौरान:
- इम्यून सिस्टम एक्टिव होता है
- स्किन पर सूजन और दर्द हो सकता है
- शरीर पहले से थोड़ा कमजोर हो सकता है
- ऐसे में ब्लड डोनेशन करने से शरीर पर और अधिक दबाव पड़ सकता है।
✅ क्या करें?
अगर आपने नया टैटू बनवाया है, तो कम से कम 6 महीने तक रक्तदान न करें। अगर आपको ब्लड डोनेट करना जरूरी लगे (जैसे किसी इमरजेंसी में), तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें और पूरी जानकारी दें।
अगर आपको बताना हो कि आपने लाइसेंस प्राप्त टैटू स्टूडियो से टैटू बनवाया है, तो उसके प्रमाण दिखाने पर कुछ ब्लड बैंक कम अवधि में भी अनुमति दे सकते हैं — लेकिन यह हर जगह लागू नहीं होता।

