भगवान श्री कृष्ण विष्णु भगवान के ही अवतार हैं। श्री कृष्ण ने माता देवकी के गर्भ से जन्म लिया था। श्री कृष्ण के जन्म के समय को पूरे भारत में जन्माष्टमी के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। श्री कृष्ण से संबंधित अनेक लीलाएँ प्रचलित है। लेकिन सबसे ज्यादा प्रश्न उनके विवाह को लेकर है कि क्या सच में श्री कृष्ण की 16108 रानियाँ थीं? आइए इसके बारे में जानने की कोशिश करते हैं।
सनातन धर्म के अनुसार श्री कृष्ण की मुख्य रूप से आठ पत्नियां थीं, जिन्हें अष्टभार्या भी कहा जाता है I इनके नाम – रुक्मणि, जामवंती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रविंदा, भद्रा, सत्या (नग्नजिती) और लक्ष्मणा था I
कृष्ण की मुख्य 8 रानियाँ और उनकी कथा:
1. रुक्मणी– रुक्मिणी, विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थी। उनका भाई रुक्मी, उनका विवाह शिशुपाल से करना चाहता था। लेकिन रुक्मिणी ने कृष्ण से ही विवाह करने का दृढ़ निश्चय कर लिया था। उन्होंने कृष्ण को एक संदेश भेजा जिसमें उन्होंने उनसे स्वयंवर से पहले ही उनका अपहरण करने का अनुरोध किया। कृष्ण ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनका अपहरण कर लिया और रुक्मी को युद्ध में हराकर उनसे विवाह कर लिया। रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है और उन्हें कृष्ण की मुख्य पत्नी का दर्जा प्राप्त है।
2, जामवंती: जामवंती श्री कृष्ण की दूसरी पत्नी थी। श्री कृष्ण ने स्यमंतक मणि के लिए 27 दिनो तक जामवंत से युद्ध किया था। अंत में जब जामवंत ने अपनी हार स्वीकार कर ली तो श्री कृष्ण को मणि लौटा दी और बदले में अपनी पुत्री जामवंती का विवाह उनसे करने का प्रस्ताव रखा, जिसे कृष्ण ने स्वीकार कर लिया। इस तरह से जामवंती और श्री कृष्ण का विवाह संपन्न हुआ।
3. सत्यभामा: सत्यभामा श्री कृष्ण की तीसरी पत्नी थी। सत्यभामा, सतराजित की पुत्री थी। सतराजित के पास ‘श्यामंतक’ नाम का एक कीमती रत्न था। जब वह रत्न खो गया, तो सतराजित ने गलतफहमी में कृष्ण पर उसे चुराने का आरोप लगाया। कृष्ण ने इस आरोप को गलत साबित करने के लिए रत्न की खोज की और जम्बावन से युद्ध किया, जिसके पास वह रत्न था। जम्बावन को हराने के बाद, कृष्ण ने रत्न सतराजित को वापस कर दिया। अपनी गलती का एहसास होने पर, सतराजित ने क्षमा मांगी और क्षमा याचना के रूप में अपनी पुत्री सत्यभामा का विवाह कृष्ण से कर दिया। सत्यभामा को देवी भूदेवी (धरती माता) का अवतार माना जाता है।
4. कालिंदी: कालिंदी श्री कृष्ण की चौथी पत्नी थी। कालिंदी सूर्य देव की पुत्री थी. कालिंदी भगवान कृष्ण को पति के रूप में देखने के लिए तपस्या कर रही थी। एक बार श्री कृष्ण अर्जुन के साथ यमुना नदी के पास से गुजर रहे थे। तभी कृष्ण ने कालिंदी को वहां तपस्या करते हुए देखा। तब कालिंदी ने अपना परिचय दिया और अपनी तपस्या के बारे में श्री कृष्ण को बताया। श्री कृष्ण उनकी भक्ति और इच्छा से बहुत प्रभावित हुए और बाद में वे द्वारकाजा कर कालिंदी के साथ विवाह कर लिए।
5. मित्रविंदा: मित्रविंदा श्री कृष्ण की पंचवी पत्नी थी। अवंतिका के राजा जयसेन की पुत्री मित्रविंदा के विवाह के लिए स्वयंबर का आयोजन हुआ था। मित्रविंदा पहले से ही श्री कृष्ण से प्रेम करती थी और उनसे विवाह करना चाहती थी। श्री कृष्ण को वहां आने का न्योता नहीं मिला था फिर भी वह बलराम जी के साथ स्वयंबर में पहुंचे। मित्रविंदा के भाइयों, विन्द और अनुविंद की इच्छा थी कि मित्रविंदा का विवाह दुर्योधन से हो जाए, जिसे अवंती और कुरु साम्राज्य के बीच गठबंधन हो सके। मित्रविंदा के भाइयों ने श्री कृष्ण का विरोध किया तब श्री कृष्ण और बलराम जी ने सभी विरोधियों को पराजित कर मित्रविंदा को द्वारका ले आये और विधिपूर्वक उनके साथ विवाह किया।
6. सत्या (नग्नजिती): सत्या कृष्ण की छठी पत्नी थी और कोसल के राजा नग्नजित की पुत्री थीं। उनके विवाह के लिए राजा ने एक कठिन शर्त रखी थी । जो भी सात पागल बैलों को काबू कर लेगा, उसी से उनकी पुत्री का विवाह होगा। जब कृष्ण ने आसानी से सभी बैलों को काबू कर लिया, तो नग्नजित ने उनका विवाह अपनी पुत्री सत्य से कर दिया।
7. भद्रा: भद्रा कृष्ण की सातवीं पत्नी थी। भद्रा कैकेयी साम्राज्य की राजकुमारी थीं। भद्रा श्री कृष्ण की मौसी श्रुतकीर्ति की पुत्री थी, इसलीये वो रिश्ते में कृष्ण की चचेरी बहन भी थी। भद्रा के पांच भाईयों में सबसे बड़े शांतार्दन के नेतृत्व में भद्रा के विवाह का स्वयंबर हुआ जिसमें भद्रा ने कृष्ण को अपने पति के रूप में चुना। इस तरह से भद्रा का विवाह श्री कृष्ण से हो गया।
8. लक्ष्मणा: लक्ष्मणा कृष्ण की आठवी पत्नी थी। लक्ष्मणा मद्र के राजा बृहत्सेना की पुत्री थी। लक्ष्मणा भी श्री कृष्ण को पसंद करती थीं। लेकिन उनका परिवार इस विवाह के लिए राजी नहीं था। राजा बृहत्सेना ने एक स्वयंवर का आयोजन किया जिसमें कई राजकुमार और राजा शामिल हुए थे। लक्ष्मणा ने कृष्ण को पसंद किया और जब उसने देखा कि कृष्ण को स्वयंवर जीतने में मुश्किल हो रही है, तो उसने कृष्ण से उससे विवाह करने को कहा। जब श्री कृष्ण को ये बात पता चली तब वो अकेले ही लक्ष्मणा का हरण कर के द्वारका ले आये और उनके साथ विवाह किया।
भौंमासुर (नरकासुर) द्वारा 16,100 रानियों का हरण
भौंमासुर, जिसे नरकासुर के नाम से भी जाना जाता है, प्राग्ज्योतिषपुर (वर्तमान असम) का एक शक्तिशाली और क्रूर राक्षस राजा था। उसने देवताओं, गंधर्वों और मनुष्यों को हराकर लगभग 16,100 राजकुमारियों और महिलाओं को बंदी बना लिया था और उन्हें अपने महल में कैद कर रखा था। उसने उन सभी को गुलाम बना लिया था और उनकी इज्जत को खतरे में डाल दिया था। जब नरकासुर के अत्याचार बहुत बढ़ गए, तो देवताओं और ऋषियों ने भगवान कृष्ण से मदद मांगी।
कृष्ण का युद्ध और उद्धार
कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा (जो भूदेवी का अवतार मानी जाती हैं) के साथ गरूड़ पर सवार होकर नरकासुर पर आक्रमण किया। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंत में, कृष्ण ने नरकासुर का वध कर दिया। नरकासुर के महल में प्रवेश करने पर कृष्ण ने उन 16,100 राजकुमारियों को बंदी पाया। वे सभी बहुत दुखी और अपमानित महसूस कर रही थीं। उन्हें समाज में लौटने की चिंता थी, क्योंकि उस समय का समाज अगवा की गई महिलाओं को शुद्ध नहीं मानता था और उन्हें स्वीकार नहीं करता था। इससे उनका भविष्य अंधकार में था।

16108 रानियों के साथ के साथ विवाह का कारण
उन सभी राजकुमारियों की यह दशा देखकर कृष्ण का हृदय करुणा से भर गया। उन्होंने उन्हें सामाजिक अपमान से बचाने और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन देने का निर्णय लिया। उन्होंने एक ही समय में हर एक के साथ अलग-अलग रूप में विवाह किया। यह विवाह उन्हें समाज में वापस लाने, उनकी इज्जत लौटाने और उन्हें एक सुरक्षित भविष्य देने का तरीका था।
इस तरह, कृष्ण ने उन सभी को “पत्नी” का दर्जा देकर उनकी रक्षा की। यह विवाह किसी व्यक्तिगत इच्छा के लिए नहीं, बल्कि उन महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया था। इसी कारण उन्हें 16,108 पत्नियों का स्वामी कहा जाता है, जिनमें उनकी आठ मुख्य पत्नियां (अष्टभार्या) भी शामिल हैं।
राधे राधे

