Chatur Admi ki kahani

क्या भगवान से ही चालाकी सही है ?

आज की ये कहानी आज कल के इंसानी फितरत के ऊपर है

कुछ इंसान बहुत भोले स्वभाव के होते हैं और कुछ इंसान बहुत चालाक होते हैं I  इंसान जब अपने पे आ जाता है तो वो भगवान को भी नहीं छोड़ता और उनसे भी चालाकी कर लेता है।

एक आदमी नारियल के पेड़ पर नारियल तोड़ने के लिए चढ़ा हुआ था। चढ़ने को तो वो चढ़ गया पर नीचे उतरते समय उसे काफी डर लग रहा था I

उसने मन ही मन भगवान से प्रार्थना की अगर वह सही सलामत नीचे उतर जाएगा तो वो भगवान को 51 रुपये का प्रसाद चढ़ाएगा।

पर जब वो थोड़ा नीचे आया तो उसकी नियत में खोट आ गई।

उसने सोचा कि 51 रुपये तो बहुत ज्यादा हो जाएगा, वो 21 रुपये का ही प्रसाद चढ़ाएगा, फिर वो नीचे उतरने लगा I

जब  वो थोड़ा और नीचे आया तो उसने सोचा कि 21 रुपये का प्रसाद चढ़ाएं या 11 रुपये का क्या फर्क पड़ता है, भगवान तो भाव के भूखे होते हैं हमारे पैसे के थोड़े ही हैं।  थोड़ा और नीचे आया तो कहता है कि सवा रुपये का प्रसाद काफी है।

इतने में उसका पैर फिसला और वो नीचे गिर गया। तब उसने बोला कि भगवान प्रसाद ना लेना हो तो मत लो लेकिन इस तरह से धक्का दे के नीचे तो ना गिराओ। ऐसा कहकर उसने सारा दोष भगवान पे ही डाल दिया I

ये है आदमी की चालाकी वो कैसे भी भगवान को नहीं छोड़ता है। जब आदमी मुसिबत में होता है तो भगवान को याद करता है। मंदिर जाएगा, पूजा करेगा, व्रत रखेगा, प्रसाद चढ़ाने को बोलेगा और जैसा ही उसका काम निकल जाता है , तो वो किसी का परवाह नहीं करता और ना किसी से मतलब नहीं रखता I

पर ये हमेशा याद रखना चाहिए कि, वह परमात्मा चतुर के साथ चतुर और भोलों के साथ भोले जैसा व्यवहार करता है। वो हमारी सभी चालाकियों को समझता है और उसी के अनुरूप हमें फल भी देता है। इसलिए हमारा कर्म हमेशा सबसे ऊपर है I

राधे राधे

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