क्या आपने कभी ऐसे पर्वत के बारे में सुना है,
- जहाँ कम्पास काम करना बंद कर देता है
- जहाँ समय तेज़ी से बीतने लगता है
- और जहाँ आज तक कोई इंसान चढ़ नहीं पाया
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं कैलाश पर्वत (Mount Kailash) की I एक ऐसा पर्वत जो जितना ऊँचा है, उससे कहीं ज़्यादा रहस्यमयी भी है।
कैलाश पर्वत को लेकर कई रहस्यमयी और अलौकिक बातें कही जाती हैं। यह पर्वत न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके साथ जुड़े वैज्ञानिक, भूगोलिक और रहस्यमयी तथ्यों ने दुनिया भर के शोधकर्ताओं और आस्थावानों को हैरान किया है।
यहां पर कैलाश पर्वत के प्रमुख रहस्यों को विस्तार से बताया गया है:
कैलाश पर्वत पर अब तक कोई भी प्रमाणित पर्वतारोहण (शिखर पर चढ़ाई) नहीं हुआ है। धार्मिक श्रद्धा और प्रशासनिक प्रतिबंधों के चलते इस पर्वत को चढ़ने योग्य नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं कि क्या इतिहास में इसपे चढ़ाईकी कोशिश कितनी बार की गई है I
इतिहास में चढ़ाई की कोशिश
1. 1926 में ब्रिटिश अधिकारी ह्यूग रटलेज (Hugh Ruttledge) ने किलाश का निरीक्षण किया और उसे “पूरी तरह से चढ़ाई योग्य नहीं” कहा। उन्होंने उत्तर-पूर्व रीज़ से चढ़ने की योजना बनाई पर समय की कमी के कारण रुक गए। उनके साथी कर्नल आर.सी. विल्सन (R.C. Wilson) ने पश्चिमी ओर से प्रयास किया पर भारी हिमपात के कारण असफल रहा I
2. 1936 में हर्बर्ट टिची (Herbert Tichy ) ने स्थानीय लोगों से पूछा कि क्या चढ़ाई संभव है, तो उसको ये कहा गया की “ केवल पाप से पूरी तरह मुक्त व्यक्ति ही कैलाश पर चढ़ सकता है” I
3. 1980 के दशक में दुनिया के महान पर्वतारोही रेनहोल्ड मेसनर (Reinhold Messner) को चीन की अनुमति मिली थी, लेकिन मेसनर ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया क्योंकि वह इसे धार्मिक और नैतिक दृष्टि से अनुचित मानते थे I
4. 2001 में एक स्पेनिश टीम को अनुमति देने की अफवाहें फैलीं, लेकिन बाद में चीनी सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि चढ़ाई की गतिविधियाँ की अनुमति कभी नहीं दी गई थी और अनुमति समाचार पूरी तरह “बिना आधार” थे I
5. तिब्बती धर्मग्रंथ कहानियों के अनुसार, मिलारेपा (Milarepa) नामक 11वीं शताब्दी के बौद्ध संत ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने कैलाश पर्वत की चोटी चढाई किया और लौटे , लेकिन यह कहानी आध्यात्मिक परंपरा का हिस्सा है, वास्तविक प्रलेखित चढ़ाई नहीं I
क्यों नहीं चढ़ सकते -धार्मिक और भौतिक कारण
धार्मिक कारण
धर्मों का केंद्र – कैलाश पर्वत को हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और बॉन धर्म में पवित्र माना जाता है। कैलाश पर्वत पर चढ़ना इन धर्मों की मान्यताओं के अनुसार गैर‑सम्मानजनक माना जाता है I
हिंदू – हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत को भगवान शिव (कैलाशपति) और देवी पार्वती का स्थायी निवास माना जाता है। यह वह स्थान है जहां शिव अपने गणों के साथ ध्यान में लीन रहते हैं।
बौद्ध – डेमचोक (Demchok) – बौद्ध धर्म में इसे बुद्ध के निवास के रूप में देखा जाता है।
जैन -पहले तीर्थंकर ऋषभदेव को यहीं मोक्ष मिला |
बोन -गुरु टोंपा शेनराब मिवोचे (Tonpa Shenrab Miwoche) यहीं से उतरे | तिब्बती बोन धर्म में कैलाश पर्वत को पृथ्वी की आत्मिक धुरी माना जाता है ।
ये तथ्य इसे दुनिया का एकमात्र ऐसा पर्वत बनाते हैं जिसे चार धर्मों ने एक साथ पवित्र घोषित किया है। एक ही पर्वत को चार धर्मों द्वारा पवित्र मानना—क्या यह संयोग है?
भौतिक कारण
इस पर्वत की भौतिक संरचना भी अति कठिन है I क्या आपको पता है, कैलाश पर्वत की आकृति बिल्कुल एक सटीक पिरामिड जैसी है? चारों दिशाओं में एकदम बराबर झुकाव, जैसे किसी ने इसे सजगता से बनाया हो, ना कि ये प्राकृतिक रूप से बना हो। क्या ये कोई प्राचीन तकनीक का चमत्कार है?
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्राचीन मानव-निर्मित संरचना हो सकती है। इसके प्रत्येक मुख बिल्कुल चार दिशाओं में हैं, उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम – जो प्राकृतिक रूप से बहुत दुर्लभ है।
तिब्बती मान्यताओं में यह जगह कालचक्र तंत्र (Wheel of Time) से जुड़ी हुई है। कुछ यात्रियों ने दावा किया है कि जब वे कैलाश पर्वत के बहुत पास गए, तो उनकी नाखून और बाल कई दिनों के बराबर बढ़ गए, जैसे समय तेजी से बीता हो। इसे समय फैलाव (Time Dilation) की घटना कहा जाता है, जो आमतौर पर ब्लैक होल या उच्च ग्रैविटी क्षेत्रों में देखी जाती है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह साबित नहीं हो पाया, लेकिन अनेक यात्रियों ने इसे अनुभव किया है।
इन्हें छोड़कर ऊँचाई, तेज़ हवाएँ, ऑक्सीजन की कमी और इसका पतली परत होना और जलवायु अत्यंत कठोर होती है I कई यात्रियों और वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कैलाश के पास जाते ही कम्पास सही दिशा नहीं दिखाता। यहाँ पर मौजूद किसी प्रकार की चुंबकीय ऊर्जा या विद्युत-चुंबकीय क्षेत्र के कारण उपकरण काम करना बंद कर देते हैं। GPS, मोबाइल सिग्नल या डिजिटल घड़ियाँ असामान्य व्यवहार करने लगती हैं।

पवित्र ओम ध्वनि Aum (ॐ): क्या आप जानते हैं कि कई लोगों का कहना है कि कैलाश पर्वत के आसपास ‘ओम’ की रहस्यमयी ध्वनि सुनाई देती है, मानो कोई अदृश्य शक्ति निरंतर जाप कर रही हो।
कुछ रोचक और अविश्वसनीय तथ्य
मानसरोवर और रक्षाताल का विरोधाभास कैलाश पर्वत के पास दो पवित्र झीलें हैं:
मानसरोवर – शांत, मीठा जल, गोल आकार – जीवन और सकारात्मकता का प्रतीक
रक्षाताल – अशांत, खारा जल, अर्धचंद्राकार – मृत्यु और नकारात्मकता का प्रतीक
ये दोनों झीलें सिर्फ कुछ किलोमीटर की दूरी पर हैं, लेकिन जलवायु और स्वभाव में पूरी तरह विपरीत हैं। यह एक अनसुलझा भूगोलिक रहस्य है।
UFO और परालौकिक गतिविधियाँ
– कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कैलाश पर्वत और उसके आसपास के क्षेत्र में UFO जैसी रहस्यमयी उड़ती वस्तुएं देखी गई हैं।
कई लोग मानते हैं कि यह स्थान ब्रह्मांड के दूसरे आयाम या एलियंस से जुड़ा हुआ हो सकता है। हालांकि ये बातें प्रमाणिक नहीं हैं, लेकिन बहुत सी किताबों और यात्रियों ने इसका उल्लेख किया है।
कैलाश-मानसरोवर यात्रा
अगर आप कैलाश पर्वत को नज़दीक से देखना चाहते हैं, तो अधिक उपयुक्त तरीका है कैलाश-मानसरोवर यात्रा और उसके चारों ओर की तीर्थपूर्ण परिक्रमा करना, जिसे धार्मिक दृष्टि से उचित माना जाता है। कैलाश पर्वत की परिक्रमा करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। तिब्बती मान्यता के अनुसार: 1 बार परिक्रमा = पाप मुक्त और 108 बार परिक्रमा = मोक्ष I परिक्रमा की लंबाई लगभग 52 किमी (52 Kilometer) है और इसे करने में 3 दिन लगते हैं।
कैलाश पर्वत आज भी विज्ञान और अध्यात्म के बीच एक पुल बना हुआ है। क्या ये सिर्फ एक पर्वत है या फिर किसी ब्रह्मांडीय शक्ति का प्रवेश द्वार? जवाब आपके विश्वास में है।
Comment में बताएं कि आपको सबसे चौंकाने वाला तथ्य कौन-सा लगा ?
हर हर महादेव

